कोका कोला 
( 2012 )
Written by - Prince Ayush 
Genre - supernatural , horror suspense thriller
                                         ( 1 )
पुणे 
ब्रीचेस रोड 
3:45  pm
शाम का समय था । सूरज अपनी किरणों को समेट कर क्षितिज की ओर धीरे - धीरे अपने कदम बढ़ा रहा था । 
आम दिनों की भाँति , 
आज भी ब्रीचेस रोड पेड़ों की सूखी पत्तियों से पटा पड़ा था । 
अचानक , 
सूखी पत्तियों को  उड़ाते हुए सड़क का सीना रौंदकर एक काली कार वहाँ से गुजरी । 
कार चालक की उँगलियाँ तेज़ी से स्टीयरिंग पर थिरक रही थी । 
साँवले रंग के  उस नौजवान ने हल्की  सी दाढ़ी रख रखी  थी । उसका व्यक्तित्व काफी आकर्षक था ...और उसका चेहरा किसी अप्रत्याशित ख़ुशी से दमक रहा था । 
तभी , 
पास वाली सीट पर रखे स्मार्टफोन का स्क्रीन चमकने लगा । 
उस शख्स ने फ़ोन साइलेण्ट मोड पर रख रखा था । 
तिरछी नजरों से उस शख्स ने स्क्रीन पर चमक रहे नाम को पढ़ा  और कार की गति हल्की सी धीमी करके उसने कॉल पिक कर लिया । 
उधर से , कॉल करने वाला कुछ कह पाता इस से पहले ही .....वो शख्स हरेक शब्द चबाकर बोलने लगा । 
" सॉरी यार ...माफ़ कर दे ...बस 10 मिनट में पहुँच रहा हूँ वहाँ ....अब तू तो जानता ही है लेट होना तेरे भाई के फितरत में है । ....."
" साले , आधे घंटे से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा ....कभी तो समय पर आ जाया कर ...अमेरिका से मैं आया हूँ लेकिन फिर भी समय पर ...और एक तू है ...अब तो सुधर जा ...सगाई होने वाली है तेरी ....ऐसी ही हालात रही तो ...आस्था  नहीं माफ़ करेगी तुझे ......." 
- उधर से किसी की आवाज आई थी ।
" बस ..बस ..भाई ...आ गया मैं ...आस्था को क्यों बीच में ला रहा है तू .....थोडा सा और वेट कर ले ....बस आ ही गया ।  " 
और इसी  के साथ कार ड्राइव कर रहे उस नौजवान ने कॉल  डिस्कनेक्ट कर दिया ।  
एक बार फिर , उस शख्स की उँगलियाँ स्टीयरिंग पर थिरकने लगी । 
कार की गति इस बार और तेज़ कर दी थी उसने ! 
कुछ देर बाद , 
वह कार एक मोड़ पर मुड़ी ...और  , फिर ...हवा की गति से धरती का सीना रौंदते हुए आगे बढ़ चली । 
उस नौजवान को अपनी मंज़िल पर पहुँचने की कुछ ज्यादा ही जल्दी थी ..क्योंकि वो ....कुछ ज्यादा ही लेट हो चुका था ।
                                           ( 2 )
IIM CAMPUS 
PUNE 
3:55  PM
कॉलेज के कैंपस में बैक गेट से वो काली कार तेज़ रफ्तार के साथ घुसी । 
कॉलेज में छुट्टीयाँ चल रही थी , सिर्फ ऑफिस खुला था ....तो उस कार को किसी ने भी नोटिस नहीं किया था । 
कार की रफ़्तार धीरे - धीरे धीमी होती जा रही थी ...क्योंकि वो शख्स अब अपनी मंज़िल पर  पहुँचने ही वाला था । 
चंद पलों बाद , 
वो काली कार एक वीरान पड़े पानी टंकी के पास खड़ी थी । ये टंकी आईआईएम में काफी पहले पानी की सप्लाई के लिए यूज़ किया जाता था ..लेकिन बाद में , ये स्टूडेंट्स के लिए  एक मस्ती स्पॉट बन गया था । इस टंकी के बड़े बड़े पिलर्स भले ही जर्जर अवस्था में अब पहुँच  गए थे ...लेकिन वो आज भी उस छत को संभाल कर रखने लायक थे जहाँ से पूरा पुणा शहर दिखता था । 
टंकी की छत तक जाने का रास्ता जर्जर सीढ़ियों से होकर जाता था । 
और , 
उस नौजवान के कदम अभी उन्हीं सीढ़ियों को तेज़ी नाप रहे थे । 
वो काफी जल्दबाज़ी में था । 
10 मिनट पूरे होने में बस अब 5 मिनट ही बचे थे ....
इसलिए , शायद ....
वो अपना स्मार्टफ़ोन  कार में ही छोड़ आया था .....
जिसकी स्क्रीन फिर से चमक रही थी .....
किसी का कॉल आ रहा था .......
पर , 
आश्चर्य की बात ये थी कि ....स्क्रीन पर जिस नंबर से कॉल आ रहा था वो नंबर ही नहीं दिख रहा था । 
बस , 
वो स्मार्टफोन लॉक पड़े उस कार में जल- बुझ रही थी ।  
                                                ( 3 )
3 :58 pm 
IIM campus 
पुणे
" मोहित भाई ...देख लो ....तुम्हारा भाई 8 मिनट में ही आ गया तुम्हारे पास...." - अंतिम सीढ़ी को लांघकर उस नौजवान ने हाँफते हुए अपने रिस्टवॉच की और ईशारा करते हुए कहा । 
अभी , उसके चेहरे पर जंग जीतने वाली मुस्कान नाच रही थी ।
उसने ये शब्द सामने खुले छत के एकदम किनारे खड़े अपने  जिगरी दोस्त मोहित को कही थी ।
" हाँ बे ....देख रहा हूँ ...पुरे एक घंटे से यहाँ अकेला खड़ा हूँ ....यार ...अयान तेरी प्रॉब्लम क्या है । अब तो बड़ा हो जा .....शेखी बघारने से फुरसत लेके गले तो मिल पहले .....पुरे 5 साल बाद मिल रहे हैं हम । ." -  मोहित की आवाज़ भावनाओं से भर्रा उठी थी । 
उसके आँखों से आंसू छलक आये । ये खुशी के आंसू थे । अयान का भी यही हाल था । 
दोनों दौड़कर एक दूसरे से लिपट गए । 
उन दोनों के लिए ये काफी ख़ुशी का पल था ।
आखिर ,
दोनों कॉलेज के दिन से ही जिगरी दोस्त जो थे । 
इसी  टंकी की छत पर आकर वो कॉलेज के दिनों में शाम को समय गुजारा  करते थे ...सुनहरे भविष्य के सपने बुनते थे । 
इनकी टोली में , एक लड़की भी थी ...नाम था  आस्था । आस्था  अयान की गर्लफ्रेंड थी और मोहित की सबसे अच्छी दोस्त ।
" और बता ...आस्था कैसी है ? मुबारक हो अब तो जल्द ही तुम दोनों एक अटूट रिश्ते की डोर से बंधने वाले हो । अयान ..."
- मोहित ने अपना गला हल्का करके ये शब्द कहे । तभी , उसकी नज़र अयान के माथे पर पड़ी ।
                                                 ( 4 )
उसके मसामों से पसीने रिस रहे थे । सूरज की किरण क्षितिज से सीधे उसके चेहरे पर पड़ रही थी । गर्मी के कारण अयान का ये हाल हो रहा था । 
" अच्छा रुक , बातें बाद में भी हो जायेगी ...पहले ये बता कोक पियेगा ..."
" ओ मोहित भाई ..क्यों मज़ाक कर रहे हो यार ..जब मैंने कहा था किसी कॉफी शॉप में मिलते हैं तो जिद करके तुमने यहां इस वीराने में बुला लिया ..अब यहां कोल ड्रिंक कहाँ से लाओगे ?  हैं ? " - अयान ने रुमाल से पसीना पोंछते हुए कहा । 
" अरे यार बुरा क्यों मानता है ...इस जगह से हमारी कितनी अटैचमेंट है ये मेरे और तेरे सिवा कौन जान सकता है ! और , कोल ड्रिंक का अरेंजमेंट मैंने पहले ही कर दिया है ...जा जाकर अपने  पुराने वाले स्टोरेज में देख  ...टंकी के पास.. " - मोहित हँसते हुए बोला ।
' ओ तेरी ! भाई ...वहाँ रखा है तुमने जहाँ हम पहले कॉलेज के दिनों में दारू  रखा करते थे ....कोल ड्रिंक के साथ बियर भी है क्या ? ' - अयान एक बच्चे की तरह नटखट अंदाज़ में बोल रहा था । 
' चल ओ बेवड़े ...तुझे पता है ना में बनारस क़े बड़े  पंडित खानदान से  हूँ ...ये सब नहीं पीता  मैं । ' 
' अच्छा - अच्छा ...पंडित मोहित शर्मा जी ...क्षमा कीजिये ...और मुझे कोल ड्रिंक लाने की इजाज़त दीजिये ...'
अयान तेज़ी से चलकर टंकी के पीछे की ओर जाने लगा ...वहाँ एक सीमेंट का बड़ा बॉक्स बना था जिसमें कॉलेज के  लड़के आज भी कॉलेज प्रशासन की नजरों से छुपाकर अपनी मज़े की चीजें रखा करते थे । 
सीमेंट का ढक्कन हटाकर 
अयान ने 2 कोका कोला के केन्स निकालें ।केन्स अभी भी काफी ठंडे थे , मानो जैसे उन्हें बस अभी ही फ्रिज से निकाल कर रखा गया हो । 
पर , 
अयान इतना खुश था की उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया ।
                                        ( 5 )
वो केन्स लेकर मोहित की ओर उत्साह में तेज़ी से लपका  ...उसे इस बात का ध्यान न रहा कि छ्त के फर्श पर ईंट के बड़े - बड़े टुकड़े भी बिखरे हैं ..वो एक बड़े टुकड़े से टकराकर गिरने ही वाला था कि मोहित ने लपक कर उसे संभाल  लिया । 
" क्या मोहित भाई ...कहा था ना इस वीराने में मिलने से कोई फायदा नही होगा ...और ऊपर से अभी , टांग - हाथ भी  कीर्तन करने लगते । " - अयान ने सँभलते हुए कहा । 
" अयान , कुछ बातें इन्हीं वीरानों में की जाती हैं ...डरो मत ..मेरे दोस्त ..तुम्हें कुछ नहीं होंगे दूंगा । " - मोहित की आवाज़ में एक रहस्यमय पुट था । 
अयान भी कुछ देर के लिए सकते में आ गया । वो ये सोच रहा था कि मोहित अचानक इतने गंभीर क्यों हो गए ! 
" हा हा हा ...चल ....चल ..कैसी लगी तुझे मेरी डायलाग डिलीवरी ! तू तो डर गया रे ।  " - मोहित ठहाके मारकर हँसते हुए बोला । 
मोहित की इस व्यवहार को बस एक मज़ाक समझ अयान फिर से नार्मल हो गया । 
उसने एक कोक मोहित को दिया और दूसरा खुद खोल कर शिप  लेने लगा । 
दोनों अब बैठकर कोक के शिप लेते हुए एक दूसरे से बातें करने लगे ।
ये पल उन दोनों के लिए काफी बेशकीमती था । 
कॉलेज के दिनों में मोहित , अयान और आस्था काफी अच्छे दोस्त थे ।  मोहित देखने में काफी अच्छा था और साथ ही काफी खुले स्वभाव का था , इसलिए लड़कियों से हमेशा उसकी पटती थी ...जबकि वहीँ दूसरी तरफ , अयान काफी शर्मीला था । आस्था से जब अयान को प्यार हुआ था तो , मोहित ने ही अयान की मदद की थी उनके इस लव स्टोरी को साकार करने में । 
बाद में , 
जब समेस्टर्स कम्पलीट हो गए तो , कैंपस सलेक्शन में मोहित को एक अमेरिकन मल्टीनेशनल कंपनी ने सेलेक्ट कर लिया और उसे अमेरिका जाना पड़ा ।
वहीँ , अयान और आस्था  को पुणे में ही एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिल गयी । 
मोहित और अयान शुरू में बराबर कांटेक्ट में थे ...पर फिर , जिंदगी के भाग - दौड़ में दोनों इतने व्यस्त हो गए कि बाद में 3 सालों तक दोनों में कोई कॉन्टेक्ट नहीं  हुआ । 
अभी बस कुछ दिनों पहले ही , जब अयान और आस्था की सगाई की डेट पक्की हुयी तो अचानक , से  अयान को मोहित का कॉल आया था । 
और , फिर अयान ने मोहित को आस्था के साथ अपनी सगाई और शादी पर  इंडिया आमंत्रित किया था । 
और , फिर आज दोनों दोस्त  5 साल के बाद फिर दोबारा  मिले थे । 
                                           ( 6 )
" आस्था ठीक है मोहित भाई , तुम्हें  हमेशा याद करती रहती है  .....अरे वो तो तुमने  पहले ही कॉल कर दिया वरना इन्विटेशन भेजता तुम्हें डायरेक्ट अमेरिका ........" - अयान ने कोक का शिप लेते हुए ये कहा । 
" तुम बताओ यार , हमें भाभी के दर्शन कब करवाओगे ...शादी का प्लान किया है कि नहीं पंडित जी ...या सारी जिंदगी ब्रम्हचर्य का ही पालन करोगे क्या ? हा हा हा "
मोहित बस मुस्कुराकर रह गया । 
उसने कोक के केन को ख़ाली कर लिया था । वो उठ खड़ा हुआ ..और केन को हाथ में लेकर खुले छत के मुहाने की ओर जाने लगा ।  
" आओ मेरे साथ , अयान ! " - मोहित के आवाज़ में फिर से रहस्य का पुट था । 
अयान ने मोहित के चेहरे पर आ रहे  बदलते रहस्यमयी भाव को नोटिस कर लिया था । वो भी उठकर मोहित के पीछे मुहाने की ओर चला । 
" कोई बात है क्या मोहित भाई ! ..तुम  कुछ परेशान दिखने लगे अचानक ! क्या मैंने कुछ गलत बोल दिया ....भाई " - इस बार , अयान का लहजा भी गंभीर था । 
मोहित ने ख़ाली केन को नीचे फ़ेंक दिया । 
कोका कोला का वह केन हवा में गोते लगाता हुआ , धरातल से जा टकराया । इतनी ऊँचाई से गिरने के कारण उसके परखच्चे उड़ गए ।
                                            ( 7 )
" नहीं ...अयान  ...ऐसी कोई बात नहीं है ...अच्छा तुम्हें याद है काफी पहले इसी जगह पर मैंने तुमसे और आस्था से एक वादा किया था । " - मोहित ने अयान के कंधे पर हाथ डालकर कहा । 
" नहीं भाई ! .....और क्या फिर तुम फिल्मी डायलाग दोहराने लगे ..क्यों मज़ाक कर रहे हो तुम भाई , कौन सा वादा ? " - अयान ने झुँझलाकर कोक का आखिरी शिप लिया । 
अब , मोहित और अयान दोनों आमने - सामने छत के किनारे खड़े थे । 
अचानक , 
मोहित का हाथ तेज़ी से अयान के गले की और बढ़ा ....
इससे पहले की , 
अयान संभल पाता ...
मोहित ने अयान को उछालकर छत से नीचे फ़ेंक दिया था । 
सबसे पहले , 
अयान के हाथ से खाली  केन छूट कर ज़मीन की और बढ़ा । नीचे , धरातल से टकराते ही केन के परखच्चे उड़ गए । 
यही हाल ...
कुछ पलों बाद ...अयान का भी होना था ! 
गिरते वक़्त , 
अयान की आश्चर्य से फ़ैली नज़रें  जब छ्त के किनारे खड़े मोहित की ओर गयी ...तो उसने देखा की मोहित की आँखों से आँसू की बुँदे गिर रही हैं ....
तभी , 
अयान को अपने कानों के पास मोहित की आवाज सुनाई दी थी ....
" वो वादा मेरे भाई , जिसे पूरा करके आज मुझे मुक्ति मिल जायेगी  ! "
                                                    ( 8 )
ब्रीचेस रोड , 
8 : 45 PM
"  नहीं मुझे मरना नहीं है ...नहीं ...नहीं ...मोहित भाई ....तुम ऐसा नहीं कर सकते ...मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ..तुम ...नहीं ...नहीं... तुम मुझे नहीं मार सकते ...हम तो अच्छे दोस्त थे न ...म....मुझसे क्या गलती हो गयी ....नहीं ..तुम ..तुम मुझे नहीं मार सकते ...मुझे नहीं मरना है ..नहीं...."
अचानक , 
अयान की आँखे खुली । उसका शरीर पसीने से लथपथ था । बदहवास सा , वह चारों तरफ देखने लगा । 
रात घिर आई थी । और , उसकी कार ब्रीचेस रोड पर बंद पड़ी थी । उसे लगा की जैसे वो किसी बहुत बुरे सपने को देख कर जगा है । उसने रुमाल से अपना पसीना पोंछा । 
तभी , 
पास वाली सीट पर रखा स्मार्टफोन जलने बुझने लगा । 
एक बार फिर , 
किसी का कॉल आ रहा था ! 
अयान की आँखें डर और आश्चर्य से चौड़ी होती चली गयी  । 
क्योंकि ....
स्क्रीन पर कोई नंबर शो नहीं  कर रहा था । 
            
                                             (  9 )
                   
अयान ने डरते - डरते कॉल रिसीव किया । यह एक वॉयस कॉल था । 
अयान के कानों से मोहित की सर्द आवाजें टकराने लगी .......
" अयान ...तू बहुत भुलक्कड़ हो गया है , यार ! आज से 5 साल पहले , जब हम सब एक शाम उस जगह मिले थे , तो तुम और आस्था अपने भविष्य को लेकर डिस्कशन कर रहे थे । उस शाम , मैंने एक वादा किया था तुम दोनों से कि तुम्हारी सगाई में मैं ........"
मोहित की सर्द आवाज इस से पहले कि ...
अयान को सारी बात कह  पाती । 
अयान के स्मार्टफोन की बैटरी डिस्चार्ज हो गयी ! 
लेकिन , 
अचानक-से,  फिर ....स्मार्टफोन खुद-ब-खुद स्विच ऑन हो गया !
पर , 
इस बार स्क्रीन पूरी तरह ब्लैक  हो गयी थी  ....
सिर्फ और सिर्फ ...
मोहित की वही सर्द आवाज फिर से सुनाई दे रही थी -
" ........अपनी खानदानी अँगूठी दूँगा ...जो तुम आस्था को सगाई पर पहनाओगे । मुझे हमेशा ये वादा याद था दोस्त । तुम मेरे भाई जैसे थे । और , हमारे वंश की परम्परा ये थी की चाहे शादी बड़े भाई की हो या छोटे भाई की , यही खानदानी अँगूठी  लड़का लड़की को पहनाता था । मेरे माँ , बाबू जी के  मृत्यु के बाद ये अँगूठी दादी माँ ने मुझे सुपुर्द किया था । और , आज ये मैं तुम्हें दे रहा हूँ भाई .....। एक रिक्वेस्ट है तुमसे , बस मेरे वंश की इस परम्परा को तुम आगे बढ़ाना ...क्योंकि मेरा वंश मेरे साथ ही ख़त्म हो गया दोस्त , हाँ ...अयान ...मेरी मौत हो चुकी है । 2 साल पहले , मुझे अमेरिका में स्टोमक कैंसर से डायग्नोज़ किया गया था ...और ...और उसके 6 महीने बाद , मेरी मौत हो गयी मेरे दोस्त ! लेकिन , मैं यहीं रहा ...मेरी आत्मा सड़ती रही लेकिन हज़ार तकलीफ़ उठाकर भी मैं 
परमात्मा के पास नहीं गया ...क्योंकि मुझे अपना वादा पूरा करना था । अब शायद , तुम्हें पता चल गया हो कि मैं तुम्हारे फ़ोन और इमेल्स का रिप्लाई क्यों नही दे पाता  था ...........मेरे दोस्त ....घबराना मत ..मैं जल्द ही आऊंगा फिर से तुम्हारे पास ...लेकिन इस बार  , नए रूप में ...और हाँ साइज़  भी थोडा छोटा हो सकता है ....चल गुड बाय ..."
इसी के , साथ ही कॉल डिसकनेक्ट हो गयी । 
अयान काफी देर तक बंद पड़े फ़ोन को ही कान में लगाकर चुपचाप बदहवास सा बैठा रहा । 
अचानक , 
उसके हाथ धीरे से कमीज के ज़ेब की ओर बढ़े ....
जेब में , एक लाल रंग का छोटा सा बॉक्स था । 
अयान ने जब बॉक्स ओपन किया -
तो , उस  हीरे की अँगूठी की चमक देख कर उसकी आँखें फैलती चली गयी । 
ऐसा लग रहा था मानो , 
उस हीरे की अँगूठी में कुछ दैवीय बात हो । 
और , होती भी क्यों ना , 
कई सौ सालों से , एक वंश बेल को आगे बढ़ाने का पवित्र  काम जो कर रही थी 
वो अँगूठी !
" मोहित भाई ..... लोग ऐसे भी अपने किये वादे पूरे करते हैं क्या ....!!!! " - और , अयान फुट - फुटकर रो पड़ा । 
वो लगातार रोता रहा । उसका सबसे अच्छा दोस्त , जो उसे छोड़कर इस दुनिया से जा चुका था !
                                                 ( 10 )
क्रूज़ ब्रिज 
पुणे 
9 :30 pm
हल्की - हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी । ब्रिज पर से एक काली कार गुजरी । यह अयान ही था । 
वो अब मोहित की अनमोल निशानी लिए घर लौट रहा था । 
उसे विश्वास था कि मोहित एक दिन फिर जरूर उसके पास लौटेगा । 
क्योंकि , अयान को पता चल चुका था कि मोहित उन लोगों में से था ..जो लोग 
अपना हरेक वादा पूरा करते हैं ...
चाहे वो 
जिन्दा हों या नहीं ! 
कोई फर्क  नहीं पड़ता !
कुछ देर बाद , 
बारिश अब तेज़ हो गयी थी । 
ब्रिज पर से गाड़ियों का गुजरना जारी था । 
वहीँ , 
नीचे एक साया , नदी के पानी पर चलता हुआ  ब्रिज की ओर बढ़ा चला जा रहा था ......
उस साये के हाथ में कुछ था ...
जिसे वो बार - बार अपने होठों से सटाकर कुछ पिए जा रहा था । 
बारिश की तेज़ बुँदे उसे छु तक नहीं पा  रही थी । 
लास्ट शिप लेकर , 
हाथ में पकड़े उस चीज़ को साये ने ब्रिज के दीवार पे दे पटका । 
और , 
वो साया ब्रिज के नीचे फैले अँधेरे में गुम हो गया । 
पर, 
वो चीज़ अभी - भी  नदी की लहरों पर हिचकोले खा रही थी ...
वो छोटी सी चीज़ कुछ और नहीं ...
एक पिचकी हुई  कोल् ड्रिंक केन थी ! 
जिस पर  लिखा था -
कोका कोला !
(समाप्त )
                                                      


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