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Showing posts from April, 2018
इश्क  इबादत (2014 ) ◆◆◆ किया  है तुझसे इश्क य़ा की  है इबादत हूँ  तेरा आशिक  य़ा झूठी  है ये चाहत ओ माहिया ज़ानू  ना मैं  ज़ानू ना . बस अब इतना इतना ही पता है हर  दर्द की हाँ हर  मर्ज  की तू  ही दवा  है तू  ही दुआ है किया  है तुझसे इश्क य़ा की  है इबादत हूँ  तेरा आशिक  य़ा झूठी  है ये चाहत ओ माहिया ज़ानू  ना  मैं  ज़ानू ना जुड़ा हूँ  मैं  तुमसे साँसे  जुड़ी मेरी फना  हूँ  मैं  तुझमें खुदाया  तू  मेरी. कलमा  इश्क  का ये सच्चा  है य़ा झूठी  है ये रब  की ईबारत ज़ानू  ना  मैं  ज़ानू ना किया  है तुझसे इश्क य़ा की  है इबादत हूँ  तेरा आशिक  य़ा झूठी  है ये चाहत ओ माहिया ज़ानू  ना  मैं  ज़ानू ना ■■■ Prince (2014 ) 
शपथ ( 2014 ) ◆◆◆ ले लो शपथ तुम आज जलते  मशालों पर  हाथ रखकर ... बनोगे सरफरोश  तुम नहीं बुजदिल  नहीं ! ले लो शपथ तुम आज लहराते तिरंगे  के नीचे खेलोगे जान पे ... लिये  कफन  हाथ में गर  मुश्किल में स्वदेश हों . ले लो शपथ तुम आज शहादत याद कर शहीदों की . हो नसीब में कुर्बानी . ज़ियो तुम देश के लिए ... मरो देशभक्त बनकर हो तुम्हारी यही कहानी  !!! ◆◆◆ Prince.
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कोका कोला   ( 2012 ) Written by - Prince Ayush   Genre - supernatural , horror suspense thriller                                           ( 1 ) पुणे   ब्रीचेस रोड   3:45  pm शाम का समय था । सूरज अपनी किरणों को समेट कर क्षितिज की ओर धीरे - धीरे अपने कदम बढ़ा रहा था ।   आम दिनों की भाँति ,   आज भी ब्रीचेस रोड पेड़ों की सूखी पत्तियों से पटा पड़ा था ।   अचानक ,   सूखी पत्तियों को  उड़ाते हुए सड़क का सीना रौंदकर एक काली कार वहाँ से गुजरी ।   कार चालक की उँगलियाँ तेज़ी से स्टीयरिंग पर थिरक रही थी ।   साँवले रंग के  उस नौजवान ने हल्की  सी दाढ़ी रख रखी  थी । उसका व्यक्तित्व काफी आकर्षक था ...और उसका चेहरा किसी अप्रत्याशित ख़ुशी से दमक रहा था ।   तभी ,   पास वाली सीट पर रखे स्मार्टफोन का स्क्रीन चमकने लगा । ...
रुसवाईयां     *** रूठी  है ज़िन्दगी सहमी  सी हर  हसीं अश्कों ने आँखों को देखो है रूलाया सौंपा था ज़िसे खुद को साँसे , धड़कन और रुह  को निकला हरजाई वो रुसवाईयां हैं तन्हाईयां हैं ज़िस्म  तो  ज़िंदा  है मगर रूह  हाँ कब की मर गई  . गम  की चादर ओढ़े मन  है सिसकुँ हर  लम्हा ... तन्हापन  है . रुसवाईयां हैं तन्हाईयां हैं ज़िस्म  तो  ज़िंदा  है मगर रूह  हाँ कब की मर गई  . टुकड़े  बन के दिल है बिखड़ा धोखा था वो कहा ज़िसे तूने ईश्का . अश्कों ने आँखों को देखो है रूलाया सौंपा था ज़िसे खुद को साँसे , धड़कन और रुह  को निकला हरजाई वो रुसवाईयां हैं तन्हाईयां हैं ज़िस्म  तो  ज़िंदा  है मगर रूह  हाँ कब की मर गई  . रुसवाईयां हैं तन्हाईयां हैं. ■■■ Prince ( 2014 )
खामोश दिल ! एे दिल . तू क्यूं  क्यूं  तू  खामोश  है . अरे  क्या  हुआ हाँ क्या  हुआ ज़िसका तुझे इत्ता अफसोस  है . एे  दिल तू क्यूं  क्यूं  तू  खामोश  है . अरे सुन ज़रा ...नजरें  उठा छोड़  गम को मत तन्हा हो देख ज़िन्दगी कितनी है हसीं आ मस्ती से इसे जीना सीख लें . अरे जो हुआ तू  भूल जा कदमें बढ़ा आगे चलना तू  सीख  ले. एे दिल . तू क्यूं  क्यूं  तू  खामोश  है माना कि  वो पास नहीं यादों  में तो है ना सही अरे सब्र कर  ज़रा तू ठहर ज़िन्दगी  तो है इक सफर कभी ना कभी कहीं ना कहीं मुलाकात होगी उस से किसी मोड़  पे ... एे दिल . तू क्यूं  क्यूं  तू  खामोश  है अरे  क्या  हुआ हाँ क्या  हुआ ज़िसका तुझे इत्ता अफसोस  है . एे  दिल... * * * Prince ( 2011 )